इश्क़ ही मज़हब मेरा
2122-2122-2122-212
इश्क ही मज़हब मेरा, मेरी इबादत है तो है,
यार का सज्दा अगर रब से बगावत है तो है//1
क्या बिछड़ना और मिलना जिंदगी की राह में,
हिज्र का ग़म ही अगर उनकी इनायत है तो है//2
पास मेरे क्या बचा जब रूह तक उसकी हुई,
जिस्म भी मेरा अगर उसकी अमानत है तो है//3
लड़ रहा है हर कोई दैरो-हरम के वास्ते,
क्या किसी को दोष दें, ऐसी सियासत है तो है//4
हम ख़ुदा से मांगते भी तो भला क्यों मांगते,
हमको सब खोकर भी खुश रहने की आदत है तो है//5
बेसबब की उलझनें हैं रायगां से मसअले,
बस यही इस जिंदगानी की हक़ीक़त है तो है//6
जो नहीं मेरा, उसे पाने की भी कोशिश न की,
पर उसे पाने की 'राजन' अब भी हसरत है तो है//7
✍️
'राजन'
इंदौर (म.प्र.)
7898897777